दबंग एसडीएम की पिटाई से नायब नाजिर की मौत, मुकदमा दर्ज

दबंग एसडीएम की पिटाई से नायब नाजिर की मौत, मुकदमा दर्ज
मौत से संघर्ष करता नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा और सीना दबाते हुए आरोपित एसडीएम लालगंज

*एसडीएम की पिटाई में जख्मी नायब नाजिर की मौत पर प्रतापगढ़ में भारी बवाल और तोड़फोड़,एसडीएम पर दर्ज हुआ हत्या का मुकदमा*

कृष्णानन्द शर्मा (राज्य ब्यूरो) उत्तर प्रदेश

लखनऊ/प्रतापगढ़।उत्तर प्रदेश के बड़के जिले प्रतापगढ़ में बड़े-बड़े कारनामे होते हैं,या यूं कहे जैसा नाम वैसा काम। एसडीएम लालगंज की बुरी तरह पिटाई से घायल नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा की शनिवार की रात मौत हो गई।सुनील शर्मा को देर शाम जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया गया था।सुनील की मृत्यु की खबर पर यूपी के कई जिलों से कर्मचारी नेता रात में आ गए और ऑपरेशन थिएटर का दरवाजा खोलने के लिए पुलिस से धक्का-मुक्की करने लगे।सुनील शर्मा की मृत्यु की सूचना के बाद हालात बिगड़ गये।इसे देखते हुए कई थानों की पुलिस जिला अस्पताल पहुंच गई।एसडीएम लालगंज के खिलाफ देर रात तक जमकर हंगामा हुआ।डीएम ने देर रात शासन से अनुमति पर एसडीएम लालगंज ज्ञानेंद्र विक्रम को हटाने का आदेश जारी किया।इसके बाद भी बवाल नहीं थमा तो रात में एसडीएम लालगंज के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ।एसडीएम पर हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद कर्मचारियों का गुस्सा शांत हुआ।डीएम ने कहा कि पोस्टमार्टम रात में ही कराया जाएगा।

*नाजिर की बुधवार की रात हुई थी पिटाई*

लालगंज तहसील में नायब नाजिर के पद पर तैनात शहर के विवेक नगर के रहने वाले सुनील कुमार शर्मा ने 31 मार्च को पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 30 मार्च की रात एसडीएम लालगंज ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह होमगार्ड के साथ आए और उन्हें डंडे से जमकर पीटा। हालांकि पुलिस तहरीर मिलने से इनकार करती रही। गुरुवार को सुनील शर्मा ने लालगंज तहसील में पहुंचकर अधिवक्ताओं व कर्मचारियों को अपनी पीठ पर चोट के निशान दिखाकर एसडीएम की बर्बरता की कहानी सुनायी थी।सुनील की हालत देखकर कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त हो गया था। गुरुवार की शाम सुनील की हालत बिगड़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने उसे लालगंज स्थित ट्रामा सेंटर में भर्ती करा दिया था।

*शनिवार की दोपहर बिगड़ी हालत फिर थम गई सांस*

सुनील शर्मा की शनिवार दोपहर बाद हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल रेफर करने के लिए औपचारिकता पूरी हो ही रही थी कि उसकी सांसें शरीर से साथ छोड़ने लगीं। सुनील शर्मा को जिला अस्पताल के आपरेशन थियेटर में ले जाया गया,जहां पर सुनील ने रात नौ बजे दुनिया को अलविदा कह दिया।इसी दौरान कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ के अध्यक्ष केडी त्रिपाठी के नेतृत्व में शनिवार की रात आठ बजे बड़ी संख्या में राज्य कर्मचारी अस्पताल पहुंच गए।गुस्साए कमर्चारियों का गुस्सा फूट पड़ा और तोड़फोड़ शुरू कर दी।पुलिस ने किसी तरह सुनील का शव एबंलुेंस से हटाने के लिए कोशिश की तो कमर्चारी एबंलुेंस के आगे लेट गए।देर रात तक जमकर हंगामा होता रहा।मौके पर कोई भी आला अधिकारी नहीं पहुंचा था।कमर्चारियों का कहना था कि जब तक एसडीएम लालगंज ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होगी तब तक शव को अस्पताल से नहीं ले जाने देंगे।कर्मचारी नेता अफसरों पर दोषी एसडीएम को बचाने का आरोप लगाते रहे। कर्मचारियों का कहना था कि तहरीर देने के बाद भी दो दिनों तक मुकदमा नहीं दर्ज किया गया।एसडीएम को हटाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने का प्रयास हुआ तो कर्मचारी फिर से हंगामा शुरू कर दिया और एंबुलेंस के सामने आ गए।

*डीएम ने हटाया एसडीएम को* 

प्रतापगढ़ जिलाधिकारी डा. नितिन बंसल ने एसडीएम लालगंज ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह के खिलाफ नायब नाजिर की पिटाई के मामले की जानकारी शासन और चुनाव आयोग को दी थी।शनिवार को जैसे ही नायब नाजिर की मौत हुई तो इसकी जानकारी जिलाधिकारी ने शासन और चुनाव आयोग को दोबारा दी। विधान परिषद चुनाव के चलते चुनाव आचार संहिता लगी है।ऐसे में जिलाधिकारी खुद कोई कार्रवाई नहीं कर सकते थे।देर रात आयोग से मिले निर्देश के बाद जिलाधिकारी डा. नितिन बंसल ने एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह को लालगंज से हटाकर अतिरिक्त में भेज दिया। 

रात में जब सुनील शर्मा के शव को एंबुलेंस से भेजा जाने लगा तो कर्मचारी फिर सामने खड़े हो गए और हंगामा करने लगे।कर्मचारियों ने कहा एसडीएम के खिलाफ मुकदमा लिखकर गिरफ्तारी की जाए तभी शव ले जाने दिया जाएगा।देर रात तक कर्मचारी आरोपी एसडीएम के खिलाफ केस दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग पर अड़े थे।घटना की जानकारी पर देर रात करीब सवा ग्यारह बजे डीएम डॉ. नितिल बंसल और एसपी सतपाल अंतिल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे।डीएम ने कर्मचारियों को समझाने के साथ ही कहा कि मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं।एसडीएम को हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है और केस दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी और वीडियोग्राफी के बीच डाक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जाएगा। परिवार के लोगों की जो भी मांगे हैं।उन्हें पूरा कराया जाएगा। 

*सीयूजी बंदकर फरार आरोपी एसडीएम खुद पहुंच गए इलाज करने* 

 सुनील शर्मा की पिटाई करने वाले लालगंज उपजिलाधिकारी ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह शनिवार दोपहर से सीयूजी मोबाइल बंद कर तहसील से गायब थे।उनकी तलाश हर कोई कर रहा था, लेकिन वह किसी के संपर्क में नहीं आ रहे थे।काफी प्रयास के बाद भी उनसे किसी की बात नहीं हो पा रही थी। देर शाम वह मेडिकल कॉलेज परिसर में आ गए। स्वास्थ्य कर्मचारियों के अनुसार पीछे के रास्ते एसडीएम लालगंज ज्ञानेंद्र सीधे वार्ड में पहुंचे।

एसडीएम स्वास्थ्य कर्मचारियों से जानकारी लेने के बाद करीब एक घंटे तक वार्ड में मौजूद रहे। सोशल मीडिया पर एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम का एक वीडियो वायरल हो रहा है।जिसमें वो घायल कर्मचारी सुनील शर्मा का बेड पर इलाज करते हुए दिखाई दे रहे हैं। गंभीर हालत में पड़े सुनील शर्मा का बेड पर वह सीना दबाते हुए दिख रहे हैं। हैरत की बात यह है कि आरोपी एसडीएम अस्पताल किस वजह से पहुंचे,जबकि उनके ऊपर कर्मचारी की पिटाई का आरोप था।दूसरी तरफ सवाल यह भी है कि एसडीएम खुद सुनील शर्मा का इलाज कैसे करने लगे,सुनील का सीना दबाने की अनुमति कैसे दे दी गई। इस बाबत कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है।

*प्रतापगढ़ में ही मिली थी पहली तैनाती* 

प्रयागराज के रहने वाले उपजिलाधिकारी ज्ञानेंद्र विक्रम की पहली तैनाती प्रतापगढ़ में ही हुई थी और जिले में बतौर प्रशिक्षु आए थे।प्रशिक्षण का समय पूरा होने के बाद उन्हें पहली तैनाती रानीगंज तहसील में दी गई थी, लेकिन वहां कुछ ही दिनों तक वह अपनी पारी खेल सके और वहां से हटाकर लालगंज एसडीएम बनाया गया था।

सूत्रों के अनुसार सुनील शर्मा ने पिटाई के बाद पुलिस को तहरीर दी थी।मामला एसडीएम से जुड़ा होने कारण पुलिस इस मामले को पूरी तरह से दबाने में जुट गई। सुनील शर्मा ने पुलिस को तहरीर देते हुए मेडिकल कराने की मांग की थी,लेकिन उसका मेडिकल नहीं हुुआ। पुलिस ने सुनील शर्मा की तहरीर मिलने से ही इनकार कर दिया,जबकि लालगंज इंस्पेक्टर ने सुनील शर्मा को डांट कर भगा दिया था।सुनील शर्मा पीठ पर चोटों के निशान लेकर इंसाफ की गुहार लगाता रहा,लेकिन पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने आंख,कान और मुंह बंद कर लिया।इस मामले में लीपापोती चलती रही।यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव में ट्रामा सेंटर में भर्ती सुनील से किसी को नहीं मिलने दिया गया।

 सुनील शर्मा की शुक्रवार की रात हालत बिगड़ने पर उपचार के लिए ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, मगर उससे किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा था। स्थानीय तहसील के अधिकारी पीड़ित कर्मचारी सुनील शर्मा से किसी को मिलने नहीं दे रहे थे। उसकी हालत बिगड़ती देख डॉक्टरों ने शनिवार सुबह करीब नौ बजे उसे मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया,मगर प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव के चलते सुनील को नहीं भेजा जा रहा था। दोपहर करीब दो बजे काफी जद्दोजहद के बाद सुनील को मेडिकल कॉलेज भेजा गया।जहां उपचार के दौरान सुनील शर्मा की हालत बिगड़ती चली गई और सुनील ने दुनिया को अलविदा कह दिया।