धरतई छान बवण्डर लइग! बदलापुर कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी को लेकर कार्यकर्ताओं के तेवर हुए बगावती

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धरतई छान बवण्डर लइग! बदलापुर कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी को लेकर कार्यकर्ताओं के तेवर हुए बगावती
बदलापुर कांग्रेस प्रत्याशी को लेकर कार्यकर्ताओं के तेवर हुए बगावती

जौनपुर'"लड़की हूं, लड़ सकती हूं" इस नारे की आड़ में कांग्रेस पार्टी द्वारा  कार्यकर्ताओं पर कमजोर प्रत्याशी थोपना गलत एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। महिला के नाम पर बड़े राजनैतिक परिवार की घरेलू बहुओं को चुनाव में प्रत्याशी बनाने से पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है। 364- बदलापुर विधानसभा से पूर्व स्व. सांसद कमला प्रसाद सिंह की पौत्र वधू को टिकट देकर पार्टी हाईकमान ने भारी भूल की है। बेशक बाबू कमला सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। पार्टी के लिए उनके संघर्ष और कुर्बानियों को भुलाया नहीं जा सकता है। लेकिन केवल इस वजह से उनके परिवार की एक ऐसी बहू को टिकट देना जिसका पूर्व में पार्टी के कार्यक्रमों और बदलापुर विधानसभा क्षेत्र के जनमानस से कोई सरोकार नहीं रहा हो, दुर्भाग्यपूर्ण और संघर्षशील कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर करने वाला एक आत्मघाती निर्णय है। महिला के नाम पर यह परिवारवाद को बढ़ावा देने वाला कदम है। जिससे कार्यकर्ताओं में भारी निराशा और आक्रोश है। 

यह सही है, कि आदरणीय पूर्व सांसद जी की यह गृह विधानसभा है। लेकिन पिछले तीन दशक से उनके परिवार का कोई भी सदस्य बदलापुर में कभी सक्रिय नहीं रहा है। उस परिवार की राजनैतिक एवं सामाजिक सक्रियता केवल जौनपुर शहर तक सीमित रहा है। बदलापुर की जनता श्रीमती आरती सिंह को बाहरी प्रत्याशी के रूप में देख रही है। बदलापुर में में बदलापुर के लिए सालों से संघर्ष करने वाले कई मजबूत कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बाद भी बदलापुर के लिए एक अपरिचित चेहरे को चुनाव मैदान में उतारना एक आत्मघाती फैसला है। बताते चलें कि बदलापुर विधानसभा से तमाम योग्य कार्यकर्ताओं ने हाईकमान से टिकट का आग्रह किया था, जिसमें पूर्व प्रदेश महासचिव यूथ कांग्रेस शार्दूल सम्राट सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष यूथ कांग्रेस सत्यवीर सिंह,पूर्व जिलाध्यक्ष व प्रत्याशी रहे रामचंद्र मिश्र,, कांग्रेस की जिला पंचायत सदस्य पद की प्रत्याशी रही सुश्री एकता दूबे,व अन्नू गुप्ता, ओमप्रकाश गुप्ता,चन्द्रसेन गुप्ता ने टिकट मांगा था, किन्तु पार्टी ने परिवारवाद को तबज्जो देकर यह साबित कर दिया कि उसे नये व उर्जावान चेहरों की आवश्यकता नहीं है, नाम न छापने की शर्त पर कई कांग्रेस नेताओं ने बताया कि यदि पुनर्विचार नहीं किया गया तो कांग्रेस यहां पर एक हजार के अन्दर सिमट कर रह जाएगी, कार्यकर्ताओं ने पार्टी हाईकमान से निवेदन किया है, कि फैसले पर पुनर्विचार करें। ताकि आम संघर्षशील कार्यकर्ताओं का मनोबल न टूटने पाये।